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ज़मीनों का बढ़ी हुई दर से मुआवज़ा देने, आबादी की समस्याओं का निस्तारण संबंधी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नोएडा के 81 गांवों के किसान प्राधिकरण के ख़िलाफ़ पिछले 28 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं. सोमवार को प्रदर्शन के बाद 1,000 से अधिक लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है. किसानों का कहना है कि इस सुनियोजित शहर (नोएडा) के विकास के लिए अपनी ज़मीन देने वाले किसानों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

नोएडा: नोएडा विकास प्राधिकरण के खिलाफ 28 दिन से चल रहा किसानों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है. किसानों ने सोमवार को एकबार फिर जोरदार प्रदर्शन किया और बैरिकेड तोड़कर प्राधिकरण के कार्यालय में घुसकर तालाबंदी करने की कोशिश की.

इस बीच सोमवार रात किसान नेता सुखबीर खलीफा समेत 1,000 से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. इसमें 20 से अधिक किसान नेता नामजद हैं.

किसानों ने प्राधिकरण के सेक्टर छह स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन पर आबादी भूमि विवाद को लेकर नोएडा प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया.

किसानों ने अतिरिक्त भूमि मुआवजे, भूमि विवाद के निपटारे सहित अन्य लाभों की मांग करते हुए नोएडा प्राधिकरण से गांवों में उनकी विस्तारित आबादी को नहीं छूने का आग्रह किया.

इस दौरान किसानों की पुलिस के साथ तीखी झड़प हुई. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ, जब किसान संगठनों ने 28 सितंबर को केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ ‘भारत बंद’ आहूत किया था.

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि किसानों के जारी प्रदर्शन के चलते प्राधिकरण की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है तथा रास्तों में अवरोधक लगाए गए हैं.

भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा के नेतृत्व में सोमवार दोपहर सैकड़ों की संख्या में किसान सेक्टर-6 में प्राधिकरण के मुख्यालय की तरफ बढ़े. इस दौरान पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प भी हुई. किसानों ने प्राधिकरण और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश के तहत अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त रणविजय सिंह ने उनसे कहा कि वे कानून अपने हाथ में न लें.

जमीनों का बढ़ी हुई दर से मुआवजा देने, आबादी की समस्याओं का निस्तारण संबंधी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नोएडा के 81 गांवों के किसान प्राधिकरण के खिलाफ पिछले 28 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों के साथ महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हैं.

हालात संभालने के लिए पुलिस ने प्राधिकरण को चारों ओर से सील कर रखा है. तीन-तीन स्तर पर बैरिकेडिंग कर किलेबंदी की गई है. 24 घंटे प्राधिकरण के बाहर पुलिस का पहरा है. दूसरी ओर किसान लगातार प्राधिकरण में घुसने की कोशिश करते रहे हैं.

किसानों का कहना है कि प्राधिकरण में बैठे अधिकारी खुद को कॉरपोरेट कंपनी का अधिकारी मानते हैं तथा उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि किसानों की जमीन पर ही उनका दफ्तर बना है.

किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने कहा कि जब तक उनकी सारी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा.

उन्होंने कहा कि प्राधिकरण व पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया था कि नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित कर उनकी समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा, लेकिन बैठक में किसानों की किसी भी समस्या का हल नहीं हुआ.

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए खलीफा ने कहा कि प्राधिकरण अधिकारियों ने किसानों की कोई मांग अपनी बोर्ड बैठक में नहीं रखी जबकि किसान 28 दिन से लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब किसानों का सब्र का बांध टूट रहा है. खलीफा ने चेतावनी दी कि आने वाले सोमवार को किसान फिर यहां आएंगे.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, किसान अपनी विभिन्न मांगो को लेकर बीते एक सितंबर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. विरोध प्रदर्शन के लिए पुलिस ने हरोला सामुदायिक केंद्र के पास एक स्थान निर्धारित किया है, ताकि वाहनों की उचित आवाजाही बनाए रखी जा सके, जो प्राधिकरण कार्यालय से लगभग 800 मीटर की दूरी पर है.

सोमवार दोपहर ट्रैक्टर पर सवार करीब 1500 किसानों ने प्राधिकरण और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्य प्रशासनिक भवन की ओर मार्च किया.

पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन किसानों ने उनकी संख्या बढ़ा दी, बैरिकेड्स हटा दिए और बाहरी परिधि पर एक गेट का ताला तोड़ दिया, जो नोएडा प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन की ओर जाता है.

वरिष्ठ किसान नेता अनिल यादव ने कहा, ‘हमारा विरोध 28 दिनों से (मंगलवार तक) चल रहा है, लेकिन नोएडा प्राधिकरण हमारी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं कर रहा है. इस सुनियोजित शहर के विकास के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.’

उन्होंने कहा, ‘ऐसा लगता है कि प्राधिकरण उनके जीवन को और बर्बाद करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे. हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सभी मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता.’

भारतीय किसान परिषद के एक किसान नेता सुखबीर आर्य ने कहा, ‘हमारे गांवों में नालियां, सीवर लाइन, पीने का साफ पानी, सड़कें या अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं. प्राधिकरण के अधिकारी राज्य सरकार को गुमराह कर रहे हैं और हमारी शिकायतों का समाधान नहीं कर रहे हैं.’

हालांकि, प्राधिकरण ने कहा कि वह कानूनी सीमाओं के भीतर किसानों की मांगों को स्वीकार करने के लिए तैयार है.

नोएडा प्राधिकरण के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘हमने कई बार किसानों के मुद्दों पर चर्चा की है और किसानों से बात करने के लिए तैयार हैं. लेकिन हम कानूनी मुद्दों के कारण उनकी कुछ मांगों को स्वीकार नहीं कर सकते. हम बैठकर इस पर चर्चा कर सकते हैं.’

नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ धरना दे रहे किसानों के खिलाफ मामला दर्ज

विभिन्न मांगों को लेकर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ धरना दे रहे किसान नेता सुखबीर खलीफा समेत 1,000 से अधिक लोगों के खिलाफ सोमवार रात को मामला दर्ज किया गया है. इसमें 20 से अधिक किसान नेता नामजद हैं. पुलिस ने यह जानकारी दी.

अपर पुलिस उपायुक्त रणविजय सिंह ने मंगलवार को बताया कि सोमवार को 1,000 से अधिक किसान हरौला बारात घर से निकलकर प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे. प्रदर्शन के दौरान उन्होंने हंगामा किया, पुलिस द्वारा लगाए गए अवरोधक तोड़ दिए और सड़क पर जाम लगा दिया. इस मामले में किसान नेता सुखबीर खलीफा समेत 1,000 से अधिक लोगों पर मामला दर्ज हुआ है.

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