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राजस्थान के करौली शहर में दो अप्रैल को हिंदू नव वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित बाइक रैली जब मुस्लिम बहुल इलाके से गुज़री, तो कथित तौर पर कुछ शरारती तत्वों ने पथराव कर दिया. इसके बाद हिंसा फैल गई थी. इस संबंध में दर्ज मुख्य एफ़आईआर में शामिल 44 आरोपियों में से एक भाजपा नेता राजाराम गुर्जर भी हैं. उनकी पत्नी जयपुर की महापौर हैं और दोनों का विवादों से पुराना नाता रहा है.

नई दिल्लीः राजस्थान के जयपुर की महापौर सौम्या गुर्जर के पति और करौली नगरपालिका के पूर्व सभापति राजाराम गुर्जर दो अप्रैल को हुई करौली सांप्रदायिक हिंसा के संबंध में दर्ज मुख्य एफआईआर में 44 आरोपियों में से एक हैं. भाजपा से जुड़े हुए ये दंपति शुरुआत से ही विवादों से घिरा हुआ है.

बता दें कि करौली शहर में दो अप्रैल को नव संवत्सर के उपलक्ष्य में आयोजित बाइक रैली जब मुस्लिम बहुल इलाके से गुज़री, तो कुछ शरारती तत्वों ने पथराव कर दिया. इसके बाद हिंसा फैल गई थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल राजाराम का नाम जयपुर नगर निगम (ग्रेटर) के बिलों के भुगतान में कथित रिश्वतखोरी मामले में सामने आया था. इस दौरान उनकी पत्नी सौम्या नगर निगम की प्रमुख थीं.

बीते साल जून में राजाराम माने जाने वाले एक व्यक्ति को कचरा संग्रहण कंपनी बीवीजी के एक प्रतिनिधि से 276 करोड़ रुपये के फर्म के बकाया बिलों को चुकाने के लिए 20 करोड़ रुपये कमीशन की मांग करते हुए एक वीडियो में देखा गया था.

इस वायरल वीडियो में कथित तौर पर आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम को भी देखा जा सकता था. इसके बाद दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में निम्बाराम को भी आरोपी के रूप में नामजद किया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि इस तरह के राजनीतिक संबंधों की वजह से राजनीति में राजाराम के परिवार का उभार हुआ. विवादों में घिरे रहने के बावजूद वह भाजपा में बने रहे. राजनीति में उनके परिवार का दबदबा है, उनकी पत्नी ही नहीं बल्कि 76 साल की उनकी मां भी जनप्रतिनिधि हैं. वह पिछले साल के अंत में भाजपा के टिकट पर करौली की मासलपुर पंचायत समिति की प्रधान चुनी गई थीं.

रिश्वतखोरी का वीडियो सामने आने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने राजाराम और बीवीजी के प्रतिनिधि ओंकार सप्रे को गिरफ्तार किया था.

पिछले साल जून में ही सौम्या को जयपुर नगर निगम (ग्रेटर) के महापौर पद से निलंबित कर दिया था. यह तब हुआ था जब तीन पार्षदों ने कथित तौर पर उनकी उपस्थिति में नगर निकाय के आयुक्त यज्ञ मित्र सिंहदेव पर हमला किया था. उनके साथ इन पार्षदों को भी निलंबित कर दिया गया था.

उस समय बीवीजी की हड़ताल की वजह से सिंहदेव और महापौर (सौम्या) के बीच कचरा संग्रहण की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर विवाद चल रहा था.

सौम्या लगभग सात महीने तक निलंबित रहीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके निलंबन आदेश पर रोक लगाने के बाद इस साल दो फरवरी को उन्होंने दोबारा कार्यभार संभाल लिया.

करौली नगर पालिका की सदस्य रह चुकीं महापौर सौम्या गुर्जर 2016 में भी सुर्खियों में रही थीं. उस समय वह राजस्थान महिला आयोग की सदस्य थीं, लेकिन एक बलात्कार पीड़िता के साथ सेल्फी खींचने को लेकर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था.

इस सेल्फी में उनके साथ आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष सुमन शर्मा भी थीं. राष्ट्रीय महिला आयोग ने सौम्या को इस असंवेदनशील कृत्य के लिए फटकार भी लगाई थी.

अपनी पत्नी की तरह ही राजाराम को भी नगर निकाय से निलंबित कर दिया गया था. 2019 के आखिर में 340 सफाईकर्मियों के वेतन बिलों पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने पर उन्होंने करौली के स्वास्थ्य अधिकारी मुकेश कुमार पर कथित तौर पर हमला कर दिया था. हाईकोर्ट द्वारा राजाराम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के बाद एक मार्च (2020) को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, करौली सांप्रदायिक हिंसा के संबंध में दंपति ने कॉल और संदेशों का जवाब नहीं दिया है. राजाराम ने करौली में पत्रकारों से कथित तौर पर कहा था कि राजनीतिक द्वेष की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.

उन्होंने यह भी दावा किया कि हिंसा के दिन वह घायलों को अस्पताल ले जाने में मदद कर रहे थे.

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एमएल लाठेर ने बीते आठ अप्रैल को कहा कि सांप्रदायिक हिंसा की जांच चल रही है और उनकी (राजाराम) भूमिका की जांच की जा रही है.

उन्होंने कहा कि पुलिस ने 10 एफआईआर दर्ज की है और मुख्य एफआईआर में नामजद 23 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. मुख्य एफआईआर हत्या का प्रयास, दंगा, आपराधिक साजिश, विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ाने और धार्मिक भावनाएं आहत करने के लिए करौली कोतवाली थाने के एसएसओ द्वारा दर्ज की गई है.

कांग्रेस के प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने कहा, ‘इन चर्चित मामलों के अलावा उनके (राजाराम) खिलाफ जमीन धोखाधड़ी के भी कुछ मामले हैं. भाजपा को जवाब देना चाहिए कि इतने सारे मामलों में राजाराम का नाम आने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई तो दूर पार्टी लगातार उन्हें ईनाम दे रही हैं.’

इसके जवाब में भाजपा विधायक और पार्टी प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कहा कि दो अप्रैल को राजाराम सैकड़ों अन्य लोगों की तरह यात्रा में शामिल हुए थे.

उन्होंने कहा, ‘अगर उनके खिलाफ तोड़फोड़ करने, आगजनी, लोगों को उकसाने के साक्ष्य हैं तो पुलिस को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन अगर वे सिर्फ इसलिए कार्रवाई कर रहे हैं, क्योंकि वह भाजपा कार्यकर्ता हैं और रैली में शामिल हुए थे, तो वे आगे बढ़े.’

इस बीच राजस्थान गृह विभाग ने आठ अप्रैल को यात्राओं के दौरान शांति और सद्भाव सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए.

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