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पिछले कुछ वर्षों से देश के अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों एवं ईसाइयों को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। दंगों, लिंचिंग, धार्मिक स्थलों एवं संस्थानों पर हमलों, धार्मिक प्रतीकों और पुस्तकों, पैग़म्बर मुहम्मद स. का अपमान, झूंठे मुक़द्दमों, आतंकवाद एवं देश-द्रोह के झूंठे आरोपों आदि के माध्यम से दबाने और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करने का प्रयास किया जा रहा है। इस विषय पर कल प्रदेश के प्रमुख मुस्लिम संगठनों के संयुक्त मंच राजस्थान मुस्लिम फ़ोरम की एक विशेष सभा आयोजित की गई, जिसमें सर्व सम्मति से निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किये गएः-
देश भर में विभिन्न स्थानों पर एनआईए तथा ईडी द्वारा पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इण्डिया (पीएफआई) के कार्यालयों पर छापेमारी और उनके नेताओं की गिरफ़्तारियाँ अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों और सरकार की ग़लत नीतियों पर आवाज़ उठाने वालों, में भय का वातावरण पैदा करने की साज़िश है, जिसके लिए पिछले काफ़ी समय से मीडिया के माध्यम से वातावरण तैयार किया जा रहा था। राजस्थान मुस्लिम फोरम के सभी घटक संगठन सरकार की इन सभी दमनात्मक कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करते हैं तथा पीएफआई के सभी नेताओं को तुरन्त बिना शर्त रिहा करने की मांग करते हैं।

केन्द्र सरकार, पिछले कई वर्षों से सत्ता और फ़ासीवादी ताक़तों के विरुद्ध उठने वाली सभी आवाज़ों को, चाहे वे संगठन हों, विपक्षी राजनीतिक दल हों, नेता हों, पत्रकार हों या बुद्धिजीवी हों, सरकारी एजेंसियों, एनआईए, ईडी, सीबीआई व पुलिस एवं राज्यों की एजेंसियों का दुरुपयोग कर इन्हें चुप कराने, डराने-धमकाने और कुचलने की रणनीति पर कार्ररत है, जिसे तुरन्त रोका जाना चाहिए।
देश में फ़ासीवादी एवं साम्प्रदायिक ताक़तें सरकारी संरक्षण में मुसलमानों, दलितों, कमज़ोर वर्गों और अन्य धार्मिक समूहों पर लगातार हमले व अत्याचार कर रही हैं, यहाँ तक कि उनके कई नेता खुले मंचों से मुसलमानों के नरसंहार के लिए लोगों को उकसा रहे हैं। सरकार इनकी असंवैधानिक एवं ग़ैर क़ानूनी हरकतों पर तुरन्त रोक लगाए और मुसलमानों के विरुद्ध भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं को तुरन्त गिरफ़्तार किया जाए।
अन्तिम ईश-दूत हज़रत मुहम्मद स. का अपमान करने का सिलसिला लगातार जारी है और यह बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे लोगों के विरुद्ध एफआईआर कराने के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है बल्कि ऐसा लगता है कि उन्हें सरकार की ओर से अभयदान मिला हुआ है। नूपुर शर्मा इसका जीता-जागता उदाहरण है। इस प्रकार के लोगों के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले नेताओं, पत्रकारों और प्रदर्शन करने वाले युवाओं को झूंठे मुक़द्दमों के तहत गिरफ़्तार किया जा रहा है, उनके घरों को बुलडोज़ किया जा रहा है और जेलों में भी उन्हें यातनाएं दी जा रही हैं। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग और अल्पसंख्यकों एवं दलितों के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैये पर तुरन्त रोक लगाई जानी चाहिए।
खुले मैदानों, भवनों और यहाँ तक कि अपने घरों में भी नमाज़ अदा करने पर मार-पीट, धमकियाँ और एफआईआर दर्ज कर शान्ति भंग करने के आरोप में गिरफ़्तार किया जा रहा है, मस्जिदों से लाउड स्पीकर पर अज़ान देने पर रोक लगाई जा रही है। दूसरी ओर कांवड़ियों पर सरकारी कर्मचारियों एवं पुलिस कर्मियों द्वारा फूल बरसाए जा रहे हैं, उनके पैर दबाए जा रहे हैं। यह देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का उपहास है और लोकतंत्र के लिए ख़तरा है। सरकार को यह दोहरी नीति तुरन्त बंद करनी चाहिये।

हाल ही में बिलक़ीस बानो केस के मुजरिमों, जिन्हें सामूहिक बलात्कार एवं हत्याओं के अपराध में देश की अदालत ने सज़ा दी थी, को न केवल सरकार की माफ़ी नीति का दुरुपयोग कर रिहा कर दिया बल्कि कुछ संगठनों ने उन अपराधियों को मालाएं पहना कर और मिठाई खिला कर उनका सम्मान भी किया। हम यह समझते हैं कि यह समपूर्ण नारी जाति का अपमान है। यह सभा मांग करती है कि बिलक़ीस बानो केस के मुजरिमों की माफ़ी को तुरन्त निरस्त किया जाए और उन्हें वापस जेल भेजा जाए।
केन्द्र और राज्यों की भजपा सरकारों द्वारा संवैधानिक अधिकार के तहत चलाए जाने वाले मदरसों का अनावश्यक रूप से सर्वे कराया जाना, उनके पदाधिकारियों एवं अध्यापकों को धमकाना, देश के मुसलमानों को भयभीत करने की साज़िश है और उनकी आस्था और धर्म पर स्पष्ट हमला है। मुसलमान, दलित और अन्य धार्मिक समूह भी देश के बराबर के नागरिक हैं अतः सरकारी तंत्र और साम्प्रदायिक संगठनों द्वारा उन्हें प्रताड़ित करने का सिलसिला तुरन्त बंद किया जाए।
राजस्थान मुस्लिम फोरम की यह सभा देश के सभी न्याय-प्रिय नागरिकों व संगठनों तथा मुस्लिम व मानवाधिकार संगठनों से यह अपील करती है कि सरकारों तथा फासीवादी एवं साम्प्रदायिक संगठनों द्वारा अलपसंख्यकों पर किये जा रहे अत्याचारों को बंद कराने और देश में न्याय, वयवस्था तथा शान्ति एवं भाईचारे का वातावरण परवान चढ़ाने और साम्प्रदायिक एवं फ़ासीवादी संगठनों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए आगे आएं।
कांफ्रेंस में शब्बीर ख़ान राजस्थान मुस्लिम फोरम, मुहम्मद नाज़िमुद्दीन जमाअते इस्लामी हिन्द, मुहम्मद साजिद सहराई वहदते इस्लामी हिन्द, सैयद सआदत अली एडवोकेट, एसोसिएशन फोर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स, नईम रब्बानी जमाअते इस्लामी हिन्द, अब्दुल लतीफ़ आरको दलित मुस्लिम एकता मंच, अब्दुल क़य्यूम अख़्तर ऑल इण्डिया मिल्ली काउंसिल, सैयद मुजाहिद अली नक़वी एडवोकेट ऑल इण्डिया मिल्ली काउंसिल, हाफ़िज़ मंज़ूर अली ख़ान ऑल इण्डिया तंज़ीम ए मिल्लत, मौलाना नाज़िश अकबर काज़मी शिया जामा मस्जिद, जयपुर, मुहम्मद मुर्तज़ा जावेद इमाम्स काउंसिल, राजस्थान, मुज़म्मिल इस्लाम रिज़वी, एपीसीआर राजस्थान, मुहम्मद नईम क़ुरैशी ऑल इण्डिया जमियतुल क़ुरैश, मुहम्मद शौकत क़ुरैशी, वक़ार अहमद वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इण्डिया, डॉ. मुहम्मद हसन इरादा सोसाइटी, मुफ़्ती शफ़ीक़ क़ायमख़ानी जमियत उलमा ए हिन्द, जयपुर डॉ. शहाबुद्दीन एसडीपीआई, राजस्थान, राजस्थान, मो. इस्लामुद्दीन राजस्थान मुस्लिम फोरम, मुफ़्ती अख़लाक़ुर्रहमान जमियत उलमा ए हिन्द मुहम्मद नज़ीर नक़वी एडवोकेट राजस्थान मुस्लिम फोरम, हाजी मुहम्मद सईद शाहिद हसन एडवोकेट, राजस्थान मुस्लिम फोरम, मो. इमामुद्दीन शेख़ जमियतुल अब्बास, राजस्थान सहित अन्य लोग मोजूद रहे .

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